Copyright@PBChaturvedi प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ'

रविवार, 26 अक्टूबर 2014

आंधियाँ भी चले और दिया भी जले

मित्रों ! एक रचना अपनी आवाज़ में  प्रस्तुत कर रहा हूँ, आशा है आप को अवश्य पसंद आयेगी...
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...



आंधियाँ भी चले और दिया भी जले ।
होगा कैसे भला आसमां के तले ।

अब भरोसा करें भी तो किस पर करें,
अब तो अपना ही साया हमें ही छले ।

दिन में आदर्श की बात हमसे करे,
वो बने भेड़िया ख़ुद जंहा दिन ढले ।

आवरण सा चढ़ा है सभी पर कोई,
और भीतर से सारे हुए खोखले ।

ज़िन्दगी की खुशी बांटने से बढ़े ,
तो सभी के दिलों में हैं क्यों फासले ।

कुछ बुरा कुछ भला है सभी को मिला ,
दूसरे की कोई बात फ़िर क्यों खले ।
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कृपया आप यहाँ अवश्य पधारें :-

श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता/कंचनलता चतुर्वेदी

रविवार, 10 अगस्त 2014

जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ

मित्रों ! एक पूर्वप्रकाशित रचना अपनी आवाज में प्रस्तुत कर रहा हूँ , इस रचना का संगीत-संयोजन और चित्र-संयोजन भी मैंने किया है | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें | आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस रचना को अवश्य पसंद करेंगे |
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...
जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ।
मैं तो केवल इतना सोचूँ।

बालिग होकर ये मुश्किल है,
आओ खुद को बच्चा सोचूँ।

सोच रहे हैं सब पैसों की,
लेकिन मैं तो दिल का सोचूँ।

बातों की तलवार चलाए,
कैसे उसको अपना सोचूँ।

ऊपर वाला भी कुछ सोचे,
मैं ही क्योंकर अपना सोचूँ।

जो भी होगा अच्छा होगा,
मैं बस क्या है करना सोचूँ।
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रविवार, 11 मई 2014

आप की जब थी जरूरत आप ने धोखा दिया

मित्रों ! एक रचना अपनी आवाज में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे आप पहले पढ़ चुके हैं , इस रचना का संगीत-संयोजन भी मैंने किया है | आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें | आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि आप इस रचना को अवश्य पसंद करेंगे |
इस रचना का असली आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...

                                              सुनिए एक नई आडियो रिकार्डिंग

आप की जब थी जरूरत, आप ने धोखा दिया।
हो गई रूसवा मुहब्बत, आप ने धोखा दिया।


खुद से ज्यादा आप पर मुझको भरोसा था कभी;
झूठ लगती है हक़ीक़त, आप ने धोखा दिया।


दिल मे रहकर आप का ये दिल हमारा तोड़ना;
हम करें किससे शिकायत,आप ने धोखा दिया।


बेवफ़ा होते हैं अक्सर, हुश्नवाले ये सभी;
जिन्दगी ने ली नसीहत, आप ने धोखा दिया।

पार जो करता 'अनघ' माझी डुबोने क्यों लगा;
कर अमानत में ख़यानत, आप ने धोखा दिया।

गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

कुछ बुरे हैं कुछ भले किरदार हैं

कुछ बुरे हैं कुछ भले किरदार हैं |
इस जहाँ में फूल हैं कुछ खार हैं |

आप कीचड़ में न पत्थर फेकिए,
राजनीतिक चोट के आसार हैं |
 
कम पढ़े जो काम करते हैं बहुत,
जो पढ़े हैं काम से लाचार हैं |
 
चैन से वो झोपड़ी में सो गए,
जागते वो,जिनके बंगले,कार हैं |
 
मृग ने शावक से कहा जाना नहीं,
उस तरफ इंसान हैं, खूंखार हैं |
 
असलियत में मित्र कोई भी नहीं,
फेसबुक पर सैकड़ों हैं, हज़ार हैं |
 
जोड़ने को जब बहुत से एप्स हैं,
तब बिखरने क्यों लगे परिवार हैं | 

( काव्योदय के फ़िलबदीह 140 से हासिल )
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शनिवार, 7 दिसंबर 2013

जाने कितनों का सपना बस सपना ही रह जाता है

जाने कितनों का सपना बस सपना ही रह जाता है।
लक्ष्य नहीं मिलता तो सिर्फ़ तड़पना ही रह जाता है।
 
सोच समझकर काम करें तो सब अच्छा होता वरना,
आखिर में बस रोना और कलपना ही रह जाता है।
 
दौलत ख़त्म हुई तो कोई साथ नहीं फिर देता है,
पूरी दुनिया में तनहा दिल अपना ही रह जाता है। 
 
रोज़ किताबें लिखते हैं वो क्या लिखते मालूम नहीं ?
कैसे लेखक जिनका मक़सद छपना ही रह जाता है !

ऊँचे-ऊँचे पद पर बैठे अधिकारी और ये मंत्री,
लक्ष्य कहो क्यों उनका सिर्फ हड़पना ही रह जाता है !

दुख से उबर जाऊँगा लेकिन प्रश्न ‘अनघ’ ये मथता है,
सोने की क़िस्मत में क्योंकर तपना ही रह जाता है ?


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बुधवार, 17 जुलाई 2013

तुम क्या दोगे साथ, किसी का कोई साथ नहीं देता है

प्रस्तुत है एक रचना जो मुझे उम्मीद है आपको अवश्य पसंद आयेगी...

तुम क्या दोगे साथ किसी का कोई साथ नहीं देता है |
सच्ची है ये बात किसी का कोई साथ नहीं देता है |

मतलब की यें बातें हमको आपस में  जोड़े रखती हैं,
हरदम ये हालात किसी का कोई साथ नहीं देता है |

हमने तुमको अपना समझा गलती मेरी  माफ़ करो तुम ,
याद रहेगी बात किसी का कोई साथ नहीं देता है |

सच्चाई को देर से जाना अपनी ख़ता तो बस इतनी है,
जानी खा कर मात किसी का कोई साथ नहीं देता है |

उम्मीदों  से आते हैं पर खाली हाथ चले जाते हैं,
कह उठते ज़ज्बात किसी का कोई साथ नहीं देता है |

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मंगलवार, 5 मार्च 2013

जो जहाँ है परेशान है

आज एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे आप अवश्य पसन्द करेंगे, ऐसी आशा है...

जो जहाँ है परेशान है ।
इस तरह आज इन्सान है।

दिल में इक चोट गहरी-सी है,
और होठों पे मुस्कान है।

कुछ न कुछ ढूँढते हैं सभी,
और खुद से ही अन्जान है।

एक शोला है हर आँख में,
और हर दिल में तूफान है।

मंजिलों का पता ही नहीं,
हर तरफ इक बियाबान है।

आदमी में में ही है देवता,
आदमी में ही शैतान है।

सबसे धोखे ‘अनघ’ वे करें,
और खुशियों का अरमान है।

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