Copyright@PBChaturvedi प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ'

शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2009

यार नहीं जो काम न आए

बहुत दिनों बाद आज कोई रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ..दरअसल मैं लगभग १ माह नेट से दूर रहा...आशा है आप को अवश्य पसंद आएगी ...

यार नहीं जो काम न आए।
प्यार वही जो साथ निभाए।

आता वक्त बुरा तो अक्सर,
जिससे आशा वो ठुकराए।

दिन में ही कुछ कोशिश कर लो,
जिससे काली रात न आए।

भाई-भाई अब लड़ते हैं,
आपस में ये बात न आए।

तू-तू,मैं-मैं करती दुनिया,
ऐसे तो हालात न आए।

सच पूछो तो वो ही जवां है,
जो मिट्टी का कर्ज़ चुकाए।
 
 
वक्त 'अनघ' बीतेगा ये जो,
दोबारा फिर हाथ न आए।
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रविवार, 27 सितंबर 2009

जो है सच्ची वही खुशी रखिये

संभवत: ३०-०९-०९ को १५ दिनों के लिए दिल्ली जाना हो,इस कारण हो सकता है कि अगला पोस्ट वहीं से प्रस्तुत करुँ | तब तक ये ग़ज़ल प्रस्तुत है....

जो है सच्ची वही खुशी रखिए।
सीधी-सादी सी ज़िन्दगी रखिए ।

जो बुरे दिन में काम आते हों,
ऐसे लोगों से दोस्ती रखिए।

वक्त जब भी लगे अंधेरे में,
साथ यादों की रौशनी रखिए।

ग़म ये कहना सभी से ठीक नहीं,
राज अपना ये दिल में ही रखिए।

चीज कोई जो तुमको पानी हो,
चाहतों में दीवानगी रखिए।

दोस्ती दुश्मनी न बन जाये,
अपने काबू में दिल्लगी रखिए।

लुत्फ़ तब दुश्मनी का आयेगा,
साथ कांटों के फूल भी रखिए।

देवता आप मत ‘अनघ’ बनना,
आप अपने को आदमी रखिए।

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शनिवार, 12 सितंबर 2009

कैसे कह दें प्यार नहीं है

अब कुछ प्यार की बात भी हो जाए | है न...!

कैसे कह दें प्यार नहीं है।
हम पत्थरदिल यार नहीं हैं।

अपनी बस इतनी मजबूरी,
होता बस इज़हार नहीं है।

मिलने का कुछ कारण होगा,
ये मिलना बेकार नहीं है।

तुम मुझको अच्छे लगते हो,
अब इससे इनकार नहीं है।

कुछ लोगों से मन मिलता है,
इससे क्या गर यार नहीं हैं।

तुम फूलों सी नाजुक हो तो,
हम भौरें हैं खा़र नहीं है।

क्या मेरे दिल में रह लोगे,
बंगला, मोटरकार नहीं है।

तनहा-तनहा जीना मुश्किल,
संग तेरे दुश्वार नहीं है।

हुश्न की नैया डूबी-डूबी,
इश्क अगर पतवार नहीं है।

मैं तबतक साधू रहता हूँ,
जबतक आँखें चार नहीं हैं । 
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रविवार, 6 सितंबर 2009

ग़ज़ल/संजीदगी से गाओ ये गीत दर्द का है

अक्सर हम गायकों को गीत गाते हुए सुनते हैं|मुझे एक बार ख्याल आया की शायद कभी ऐसा भी होता होगा कि गीत तो दर्द भरा हो,पर गायक उसे हलके-फुल्के अंदाज़ में गाए जा रहा हो|जबकि उसे संजीदगी से वह गीत गाना चाहिए था|बस बन गई कुछ पंक्तियाँ :-

संजीदगी से गाओ ये गीत दर्द का है।
ऐसे न मुस्कुराओ ये गीत दर्द का है।

शायर का दर्द तेरी आवाज़ में भी उभरे,
ऐसी कशिश से गाओ ये गीत दर्द का है।

गुजरा है ये तुम्हीं पर ऐसा लगे सभी को,
आँखों में अश्क लाओ ये गीत दर्द का है।

जितने भी सुन रहे हों उस गम में डूब जायें,
कुछ यूँ समां बनाओ ये गीत दर्द का है।

जब लिख रहा था इसको रोया बहुत था दिल ये,
वो दर्द फिर जगाओ ये गीत दर्द का है।

वो सच्ची शायरी है दिल पर असर करे जो,
दिल में ‘अनघ’ समाओ ये गीत दर्द का है।

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रविवार, 30 अगस्त 2009

बात करते हैं हम मुहब्बत की

बात करते हैं हम मुहब्बत की, और हम नफ़रतों में जीते हैं।
खामियाँ गैर की बताते हैं, खुद बुरी आदतों में जीते हैं।

चाहते हैं सभी बढ़ें आगे, तेज रफ़्तार जिन्दगी की है,
भागते दौड़ते जमाने में, हम बड़ी फ़ुरसतों में जीते हैं।

आज तो ग़म है बेबसी भी है, जिन्दगी कट रही है मुश्किल से,
आने वाला समय भला होगा, हम इन्हीं हसरतों में जीते हैं।

आज के दौर में कठिन जीना और आसान है यहाँ मरना,
कामयाबी बडी़ हमारी है, हम जो इन हालतों में जीते हैं।

चीज जो मिल गई वो मिट्टी है और जो खो गया वो सोना था,
जो ‘अनघ’ चीज मिल नहीं सकती, हम उन्हीं चाहतों में जीते हैं।
 

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शुक्रवार, 28 अगस्त 2009

मुझे तनहाइयां भाती नहीं है

मुझे तनहाइयां भाती नहीं हैं। 
मैं तन्हा हूँ तू क्यों आती नहीं है।

तुझे ना देख लें जबतक ये नज़रें,
सुकूं पल भर भी ये पाती नहीं है।

गये हो दूर तुम जबसे यहाँ से,
बहारें भी यहाँ आती नहीं है।

तराने गूंजते थे कल तुम्हारे,
वहाँ कोयल भी अब गाती नहीं है।

तुझे अपना बनाना चाहता था,
कसक दिल की अभी जाती नहीं है।

शिकायत है ‘अनघ’ किस्मत से अपने,
मुझे ये तुमसे मिलवाती नहीं है।

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शुक्रवार, 21 अगस्त 2009

मंजिल को पाने की खातिर

मंजिल को पाने की खातिर, कोई राह बनानी होगी ।
दूर अंधेरे को करने को, शम्मा एक जलानी होगी ।

अंगारों पर चलना होगा , काँटों पर सोना होगा ;
कितने ख्वाब तोड़ने होंगे, कितनी चाह मिटानी होगी ।

बस दो ही तो राहें अपने , इस जीवन में होती हैं ;
अच्छी राह चुनो तो अच्छा, बुरी राह नादानी होगी ।

इतना भी आसान नहीं है, मंजिल को यूँ पा लेना ;
कुछ पाने की खातिर तुमको, देनी कुछ कुर्बानी होगी।

लीक से हटकर चलना तो अच्छा है लेकिन मुश्किल है;
दिल में हिम्मत जारी रखोगे तो बड़ी आसानी होगी ।

दुनिया वाले कुछ बोलेंगे, जैसी उनकी आदत है
लेकिन जब मंजिल पा लोगे, दुनिया पानी-पानी होगी ।

पैदा होकर मर जाते हैं, जाने कितने लोग यहाँ ;
आज ‘अनघ’ कुछ नया करो तो, तेरी अमर कहानी होगी ।

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