Copyright@PBChaturvedi प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ'

मंगलवार, 5 मार्च 2013

जो जहाँ है परेशान है

आज एक ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे आप अवश्य पसन्द करेंगे, ऐसी आशा है...

जो जहाँ है परेशान है ।
इस तरह आज इन्सान है।

दिल में इक चोट गहरी-सी है,
और होठों पे मुस्कान है।

कुछ न कुछ ढूँढते हैं सभी,
और खुद से ही अन्जान है।

एक शोला है हर आँख में,
और हर दिल में तूफान है।

मंजिलों का पता ही नहीं,
हर तरफ इक बियाबान है।

आदमी में में ही है देवता,
आदमी में ही शैतान है।

सबसे धोखे ‘अनघ’ वे करें,
और खुशियों का अरमान है।

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सोमवार, 21 जनवरी 2013

किसने की है घात न पूछो

       मित्रों, छोटी बहर की ग़ज़लें मुझे बहुत पसन्द हैं; कहना भी और पढ़ना या सुनना भी। आज छोटी बहर की ये ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है कि ये आप को पसन्द आयेगी। है न..........!

दर्दे-दिल की बात न पूछो।
क्यों ज़ख्मी जज़्बात न पूछो।
 
घावों को मत और कुरेदो,
कैसे खाई मात न पूछो |

दिल की बेताबी कैसी है,
क्यों बेचैन है रात न पूछो।


देने वाला अपना ही था,
दी किसने, सौगात न पूछो।

बिन बादल के क्यों होती है,
अश्कों की बरसात न पूछो।


मजबूरी में ठीक कहूँगा,
कैसे हैं हालात न पूछो।
 
 
आज 'अनघ' गमगीन बहुत है,
आज तो कोई बात न पूछो।

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  गीत ग़ज़ल की दुनियाँ में इस बार देखें-
बनारस के श्री विन्ध्याचल पाण्डेय की रचनाएं ....

रविवार, 9 दिसंबर 2012

एक रोमांटिक रचना/सुनने के लिए है न सुनाने के लिए है

प्रस्तुत है एक रोमांटिक रचना जिसे मैं पहले भी पोस्ट कर चुका हूँ पर इस बार अपनी आवाज़ में इसे प्रस्तुत कर रहा हूँ। आशा है आप को ये रचना अवश्य भायेगी....
अपनी ये रचना मैं स्वर्गीय मोहम्मद सलीम राही को समर्पित करता हूँ जो आकाशवाणी वाराणसी में कार्यरत थे और एक अच्छे शायर थे। उन्होंने मेरी ग़ज़लों को बहुत सराहा और ये रचना उन्हें बहुत अच्छी लगती थी। इसको उन्हीं की वजह से सेतु [ एक संस्था जिसमें संगीतमय प्रस्तुति होती थी ] में शामिल किया गया था और इसे वहाँ ambika keshari ने अपनी आवाज़ दी थी।

                                                  यू-ट्यूब पर सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें-
  
आडियो सुनने के लिये यहाँ क्लिक करें-
http://www.divshare.com/download/21387297-0f7

सुनने के लिए है न सुनाने के लिए है ।
ये बात अभी सबसे छुपाने के लिए है ।

संसार के बाज़ार में बेचो न इसे तुम ,
ये बात अभी दिल के ख़जाने के लिए है ।

इस बात की चिंगारी अगर फ़ैल गयी तो ,
तैयार जहाँ आग लगाने के लिए है ।

आंसू कभी आ जाए तो जाहिर न ये करना ,
ये ग़म तेरा मुझ जैसे दीवाने के लिए है ।

तुम प्यार की बातों को जुबां से नहीं कहना ,
ये बात निगाहों से बताने के लिए है ।
 
 
होता है सितम प्यार पे दुनिया में हमेशा ,
ये बात ज़मानों से ज़माने के लिए है ।

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शनिवार, 31 मार्च 2012

ना कभी ऐसी कयामत करना

 प्रस्तुत है एक रचना जो आशा है कि आप को अवश्य पसन्द आयेगी :-

ना कभी ऐसी कयामत करना।
यार बनकर तू दगा मत करना।

जब यकीं तुमपे कोई भी कर ले,
ना अमानत में ख़यानत करना।

दूसरों की नज़र
तुम देखो,
अपनी नज़रों में गिरा मत करना।

प्यार तुमको मिले जिससे यारों,
तुम कभी उससे जफ़ा मत करना।

वो जो दुश्मन तेरे अपनों का हो,
मिलना चाहे तो मिला मत करना।

जिसके दामन में तेरे आंसू गिरें,
 
तू कभी उसको ख़फ़ा मत करना।

मंगलवार, 13 मार्च 2012

औरों से तो झूठ कहोगे

 प्रस्तुत है एक आत्मविश्लेषणात्मक ग़ज़ल ( बहर  :-फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फेलुन फा )  :-

औरों से तो झूठ कहोगे, ख़ुद को क्या समझाओगे।
तनहाई में जब तुम ख़ुद से, अपनी बात चलाओगे।

झूठ, फरेब, दगाबाजी, नफरत, बेइमानी, मक्कारी,
करते हो, छलते हो सबको; पर कबतक छल पाओगे।

कुछ लम्हें ऐसे आते हैं, इन्सां जब पछताता है,
ऐसे लम्हें जब आयेंगे, तुम भी बहुत पछताओगे।

जीने की खातिर दुनिया में, तुम ये करते हो माना,
लेकिन औरों को दुख देकर, क्या सुख से जी पाओगे।

चोट किसी को देते हो खुश होते हो लेकिन सुन लो,
खुश ज्यादा होओगे किसी के, चोट को जब सहलाओगे।

जान बचाने में जो सुख है, कोई कातिल क्या जाने,
तुम ये ‘अनघ’ करके देखो तो, एक नया सुख पाओगे।

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